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तुरन्त की ताज़ा ताज़ा पँक्तियाँ रसस्वादन कीजिये ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कोई रङ्ग ही नही चढ़ता मेरे ख़ुद्दार लहज़े पे ,
नज़र में आ गया ज़ब से तेरे रुख़शार का रङ्ग ।
रुखशार - गाल
मुलम्मा बाहरी है ये ज़ो कल तक छूट जायेगा ,
ये रङ्ग फीके ज़ब निखरे मेरे दिलदार का रङ्ग ।!
कल से भावनाओं की झड़ी सी लग गयी है लिखने पर मज़बूर हो जाता हूँ ।
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तुरन्त की ताज़ा ताज़ा पँक्तियाँ रसस्वादन कीजिये ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कोई रङ्ग ही नही चढ़ता मेरे ख़ुद्दार लहज़े पे ,
नज़र में आ गया ज़ब से तेरे रुख़शार का रङ्ग ।
रुखशार - गाल
मुलम्मा बाहरी है ये ज़ो कल तक छूट जायेगा ,
ये रङ्ग फीके ज़ब निखरे मेरे दिलदार का रङ्ग ।!
कल से भावनाओं की झड़ी सी लग गयी है लिखने पर मज़बूर हो जाता हूँ ।
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मुस्कुराहट बनी रहे
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