ना कभी बदले ये लम्हा,,,,,ना कभी बदले ये ख्वाहिश हमारी...!!
"हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे के रहे,,,,,जैसे "तुम चाहत मेरी" और "मैं जिंदगी तुम्हारी"...!!
तुम्हारी यादे-कितना कुछ कह जाती हैं
शुक्रवार, 2 मार्च 2018
राधा के श्याम
तुम भी खेलो, हम खेल रहे हैं
करें जब पांव खुद नर्तन, समझ लेना की होली है
हिलोरें खा रहा हो मन, समझ लेना की होली है
इमारत इक पुरानी सी, रुके बरसों से पानी सी
लगे बीवी वही नूतन,समझ लेना की होली है
तरसती जिसके हों दीदार तक को , आपकी आंखें
उसे छूने का आये क्षण, समझ लेना की होली है
कभी खोलो हुलस कर आप , अपने घर का दरवाजा
खड़े देहरी पे हों साजन, समझ लेना की होली है
हमारी ज़िन्दगी है यूं तो, इक कांटों भरा जंगल
अगर लगने लगे मधुबन, समझ लेना की होली है
अगर महसूस हो तुमको, कभी जब सांस लेते हो
हवाओं में घुला चन्दन, समझ लेना की होली है
बुलायें पास जब तुमको , धुनें मेरी मुहब्बत की
जब गाये ताल पे धड़कन , समझ लेना की होली है
!!....समझ लेना की होली है....!!
हिलोरें खा रहा हो मन, समझ लेना की होली है
इमारत इक पुरानी सी, रुके बरसों से पानी सी
लगे बीवी वही नूतन,समझ लेना की होली है
तरसती जिसके हों दीदार तक को , आपकी आंखें
उसे छूने का आये क्षण, समझ लेना की होली है
कभी खोलो हुलस कर आप , अपने घर का दरवाजा
खड़े देहरी पे हों साजन, समझ लेना की होली है
हमारी ज़िन्दगी है यूं तो, इक कांटों भरा जंगल
अगर लगने लगे मधुबन, समझ लेना की होली है
अगर महसूस हो तुमको, कभी जब सांस लेते हो
हवाओं में घुला चन्दन, समझ लेना की होली है
बुलायें पास जब तुमको , धुनें मेरी मुहब्बत की
जब गाये ताल पे धड़कन , समझ लेना की होली है
!!....समझ लेना की होली है....!!
फीके रङ्ग
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
तुरन्त की ताज़ा ताज़ा पँक्तियाँ रसस्वादन कीजिये ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कोई रङ्ग ही नही चढ़ता मेरे ख़ुद्दार लहज़े पे ,
नज़र में आ गया ज़ब से तेरे रुख़शार का रङ्ग ।
रुखशार - गाल
मुलम्मा बाहरी है ये ज़ो कल तक छूट जायेगा ,
ये रङ्ग फीके ज़ब निखरे मेरे दिलदार का रङ्ग ।!
कल से भावनाओं की झड़ी सी लग गयी है लिखने पर मज़बूर हो जाता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
तुरन्त की ताज़ा ताज़ा पँक्तियाँ रसस्वादन कीजिये ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कोई रङ्ग ही नही चढ़ता मेरे ख़ुद्दार लहज़े पे ,
नज़र में आ गया ज़ब से तेरे रुख़शार का रङ्ग ।
रुखशार - गाल
मुलम्मा बाहरी है ये ज़ो कल तक छूट जायेगा ,
ये रङ्ग फीके ज़ब निखरे मेरे दिलदार का रङ्ग ।!
कल से भावनाओं की झड़ी सी लग गयी है लिखने पर मज़बूर हो जाता हूँ ।
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ना कभी बदले ये लम्हा,,,,,ना कभी बदले ये ख्वाहिश हमारी...!! "हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे के रहे,,,,,जैसे "तुम चाहत मेरी" और ...