शुक्रवार, 2 मार्च 2018

फीके रङ्ग

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

तुरन्त की ताज़ा ताज़ा  पँक्तियाँ रसस्वादन  कीजिये ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

कोई रङ्ग ही नही चढ़ता मेरे ख़ुद्दार लहज़े पे ,
नज़र में आ गया ज़ब से तेरे रुख़शार का रङ्ग ।

रुखशार - गाल

मुलम्मा बाहरी है ये ज़ो कल तक छूट जायेगा ,
ये रङ्ग फीके ज़ब निखरे मेरे दिलदार का रङ्ग ।!

कल से भावनाओं की झड़ी सी लग गयी है लिखने पर मज़बूर हो जाता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

1 टिप्पणी:

राधा के श्याम

ना कभी बदले ये लम्हा,,,,,ना कभी बदले ये ख्वाहिश हमारी...!! "हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे के रहे,,,,,जैसे "तुम चाहत मेरी" और ...